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महिलाओं में पेल्विक दर्द की समस्या

पेल्विक दर्द क्या है ? पैल्विक दर्द के लक्षण , इसके कारण एवं पेल्विक दर्द के लिए कौन – कौन से परिक्षण होते हैं ? पेल्विक दर्द को दूर करने के उपाए .

पेल्विक दर्द हमारे पेट में नाभि के निचले हिस्से में उत्पन्न दर्द को कहते है। यह अक्सर महिलाओं के आंतरिक प्रजनन अंगों के क्षेत्र में होने वाले दर्द को संदर्भित करता है एवं कभी – कभी यह दर्द असहनीय भी हो जाता है।

पेल्विक दर्द साधारणतः दो प्रकार के होते है :-

1) साधारण पेल्विक दर्द

2) क्रोनिक पेल्विक दर्द।

साधारण पेल्विक दर्द अधिकतम 3 महीने या उससे कम समय तक रहता है वहीँ क्रोनिक पेल्विक दर्द 6 महीनों तक रहता है। किसी ऐसे प्रकार के पैल्विक दर्द जो अचानक आये हो और तीव्रता के साथ उत्पन्न हुए हो , उन्हें गंभीरता से लेने की आवश्यकता होती है एवं उन्हें तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

ऐसे किसी भी प्रकार के नए पैल्विक दर्द जिसके कारण रोज़मर्रा के कार्य करने में भी समस्या उत्पन्न होने लगे और समस्या लगातार बढ़ता जाये तो ऐसी स्थिति में इसका मूल्याँकन करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

पेल्विक दर्द को पहचानने के कई तरीके होते है। पेल्विक दर्द विभिन्न प्रकार से उत्त्पन्न होता है। यह दर्द कभी धीरे – धीरे होता है तो कभी यह तेज शुरू हो जाता है। कभी- कभी यह दर्द तरंगो के रूप में भी होता है। जैसे इसकी शुरुआत तो धीमे से होती है परन्तु फिर यह धीमे से तेज होने लगता है।

यह स्थिर हो सकता है या आता जाता रह सकता है। इसके दौरान कभी तेज़ या मंद या ऐंठनयुक्त दर्द हो सकता है (जैसे माहवारी की ऐंठन), या कभी इन सबका संयोजन होता है।

पैल्विक दर्द कभी-कभी कुछ लक्षणों के साथ भी आता है जिसकी जानकारी प्राप्त कर समय रहते इसका उपचार किया जा सकता है। पैल्विक दर्द के कुछ लक्षण ऐसे होते है जो अत्यधिक तकलीफ दे होते है।

इनके लक्षणों को हम निम्न प्रकार से देख सकते है :-

  • चक्कर आना या कभी बेहोशी आना।
  • पेट में गैस का बनना ।
  • कब्ज़ या दस्त की शिकायत आना।
  • कभी अचानक,गंभीर दर्द की समस्या आने लगती है।
  • कभी घबराहट के साथ मतली, उलटी, अत्यधिक पसीना आने की समस्या आने लगती है।
  • बुखार या ठण्ड लगने की समस्या होने लगती है।
  • पेशाब करने में जलन या कठिनाई होना।
  • कमर एवं कूल्हे के क्षेत्र में दर्द होना।
  • शौच करते समय रक्तस्राव होना।

पेल्विक दर्द होने के कोई एक कारण नहीं होते है। इसकी समस्या कई कारणों से हो सकती है।

पैल्विक दर्द होने के कुछ कारण निम्नलिखित है :-

  • अपेंडिसाइटिस ( Appendicitis ).
  • हरनिया ( Hernia ) – यह समस्या पेट या कमर में तब होती है, जब आपका कोई अंग उस मांसपेशी या ऊतक को धकेलता है जिसमें वह स्थित होता है।
  • पैल्विक विकार (जैसे पैल्विक मांसपेशियों की जकड़न और ऐंठन)। (Pelvic disorders (such as pelvic muscle stiffness and spasms).
  • टूटी पेल्विक हड्डियाँ(Broken pelvic bones).
  • गुर्दे का संक्रमण या गुर्दे की पथरी ( Kidney infection or kidney stones ) .
  • कब्ज या दस्त ( Constipation or diarrhea ).
  • सूजन या गैस (Bloating or gas) .
  • आंत संबंधी विकार (जैसे डायवर्टीकुलिटिस या कोलाइटिस)। ( Intestinal disorders (such as diverticulitis or colitis).
  • तंत्रिका संबंधी स्थितियां (जैसे कि आपकी रीढ़ की नसों का दब जाना) ( Neurological conditions (such as compression of your spinal nerves).
  • पथरी ( Stones ).
  • पेल्विक सूजन रोग (पीआईडी) ( Pelvic inflammatory disease (PID).
  • मूत्राशय संबंधी विकार (bladder disorders )

इसके अतिरिक्त कुछ विशेष कारण भी होते है जिसके कारण महिलाओं को पेल्विक दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है। जैसे :

  • गर्भाशय कर्क रोग (uterine cancer)
  • गर्भावस्था (pregnancy )
  • अस्थानिक गर्भावस्था ( ectopic pregnancy) – यह तब होती है जब एक निषेचित अंडा शरीर में कहीं और जुड़ जाता है, साधारणतः फैलोपियन ट्यूब में।
  • गर्भपात ( Abortion)
  • ओव्यूलेशन(Ovulation)
  • मासिक धर्म ऐंठन (menstrual cramps)
  • डिम्बग्रंथि अल्सर या अन्य डिम्बग्रंथि विकार।( Ovarian cysts or other ovarian disorders) .
  • गर्भाशय फाइब्रॉएड ( uterine fibroids )
  • ग्रीवा कैंसर ( cervical cancer )
  • एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis ) – यह गर्भाशय (Uterus) में होने वाली समस्‍या है। जिसमें एंडोमेट्रियल टिशूओं में असामान्य बढ़ोतरी होने लगती है और वह गर्भाशय से बाहर फैलने लगते हैं।

पेल्विक दर्द के परिक्षण अनुभवी डॉक्टर्स द्वारा किसी भी असामान्य स्थिति में किये जाते है। महिला से दर्द और स्वास्थय के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। जिसके द्वारा उन्हें हो रही समस्या के प्रकार और कारण का पता चलता है।

उनका शारीरिक परिक्षण जैसे – योनि, गर्भाशय ग्रीवा, अंडाशय, गर्भाशय, मलाशय और श्रोणि की जाँच की जाती है।
इसके अतिरिक्त कुछ और भी परिक्षण किये जाते है जिनका वर्णन निम्नलिखित है।

  • लैब आधारित परीक्षण – सबसे पहले मरीज़ का लैब आधारित परिक्षण जैसे रक्त एवं मूत्र परीक्षण किया जाता है। जिसके आधार पर कोशिका की गणना की जाती है , रक्त में पाए जाने वाले विभिन्न रसायनों की माप और सूजन के मारकर शमिल किये जाते है। अन्य कई चीजों की भी माप की जाती है जैसे – नमक , रक्त कोशिका की गिनती एवं ह्रदय के लिए विशिष्ट प्रोटीन की माप की जाती है।
  • पेल्विक अल्ट्रासाउंड – यह एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें पेल्विक क्षेत्र के अंदर अंगों और संरचनाओं को देखने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है।
  • MRI (एमआरआई) – MRI (चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग) स्कैन, यह एक ऐसा तस्वीर परिक्षण होता है जिसमें श्रोणि की तस्वीरें बनाने के लिए शक्तिशाली चुंबक और रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है।
  • पेल्विक लैप्रोस्कोपी – इस प्रक्रिया में पेशेंट की छोटी सी सर्जरी की जाती है जिसमें डॉक्टर श्रोणि के अंदर देखने के लिए नाभि के नीचे की त्वचा में एक छोटा सा कट करते है एवं उसके माध्यम से लैप्रोस्कोप नामक एक देखने वाला उपकरण डालते है एवं जाँच की प्रक्रिया की जाती है।
  • सिस्टोस्कोपी – इस प्रक्रिया के दौरान एक देखने वाला उपकरण डालकर मूत्राशय की जाँच की जाती है एवं समस्या का पता लगाया जाता है।
  • कोलोनोस्कोपी – यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आंत के अंदर देखने के लिए किसी उपकरण का प्रयोग किया जाता है।
  • पैप परीक्षण – यह परिक्षण सर्वाइकल कैंसर की जांच करता है। यह अक्सर पैल्विक परीक्षा के दौरान की जाने वाली प्रक्रिया है।
  • सीटी स्कैन – इसके द्वारा आपके पेट और श्रोणि का क्रॉस-सेक्शनल छवियां बनाने के लिए एक्स-रे और कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है।

पेल्विक दर्द एक ऐसी समस्या है जिसका निवारण परिक्षण के बाद ही करना सुरक्षित होता है। उसके लिए विभिन्न जाँच की आवश्यकता होती है। परन्तु क्रोनिक पेल्विक दर्द की स्थिति में कुछ उपायों द्वारा इसमें राहत प्राप्त की जा सकती है। इसके कुछ उपाए निम्नलिखित है :-

  • दर्द निवारक दवाओं का प्रयोग :- डॉक्टर की सलाह पर प्राथमिक चिकित्सा के तौर पर कुछ दर्द निवारक दवाओं का प्रयोग किया जा सकता है।
  • वजन नियंत्रित करें – इस समस्या से बचने के लिए वजन बढ़ने से रोकना अत्यंत आवश्यक हैं। क्योंकि वजन बढ़ने से इस समस्या के होने की सम्भावना बढ़ जाती हैं।
  • व्यायाम करें :- व्यायाम रक्त संचार को बनाये रखने में सहायता करता है। अतः व्यायाम के द्वारा दर्द को कुछ हद तक कम करने में सहायता मिलती है।
  • गर्म सेक लें :– हीटिंग पैड या अन्य उपाय से गर्म पानी के सेक लेने से भी दर्द में आराम मिलता है।
  • जीवन शैली को सुधारे – इसके उपचार के लिए सर्वप्रथम यह आवश्यक है की आप अपनी जीवन शैली में सुधार लाएं। एवं अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का प्रयास करें। धूम्रपान , शराब इत्यादि जैसी बुरी आदतों को छोड़ने का प्रयास करें।
  • विटामिन प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का प्रयोग करें :- पोस्टिक एवं संतुलित आहार लें। दर्द के निवारण के लिए विटामिन एवं प्रोटीन युक्त आहार लेने की भी आवश्यकता होती है जो शरीर को ताकत प्रदान करने में सहायक होती है।

उपरोक्त विवरण से यह ज्ञात किया जा सकता है की पेल्विक दर्द महिलाओं में होने वाली सामान्य समस्या है। किन्तु कभी – कभी यह समस्या सामान्य से अधिक हो जाती है।ऐसी स्थिति में अनुभवी डॉक्टर से उपचार लेना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

डॉक्टर द्वारा विभिन्न प्रकार के जांचों के द्वारा इसके कारण एवं स्थिति को जानने की कोशिश की जाती है। फिर जांचों के आधार पर डॉक्टर द्वारा उपचार किया जाता है।

क्रोनिक दर्द की स्थिति में कुछ उपायों द्वारा दर्द को कम किया जा सकता है । परन्तु पूर्ण निवारण जांचों एवं डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं द्वारा ही की जा सकती है।