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डायबिटीज के कारण, लक्षण और उपाय।

डायबिटीज –

मधुमेह की बीमारी को डायबिटीज या शुगर भी कहा जाता है। डायबिटीज एक मेटाबॉलिक डिसॉर्डर है, जो आज के समय में बहुत सामान्य समस्या हो गई है।

यह एक अनुवाशिंक बीमारी भी होती है और इसका कारण खराब जीवनशैली भी हो सकती है। व्यक्ति के लिए ब्लड शुगर लेवल का ना तो सामान्य से अधिक होना ठीक रहता है और ना ही सामान्य से कम होना ठीक रहता है। और इस बीमारी में दोनों में से कोई भी स्थिति आ सकती हैं।


इसी वजह से डायबिटीज के मरीजों को अपने खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि अगर मधुमेह का लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाए या फिर बहुत ज्यादा कम हो जाए, तो दोनों ही स्थिति मरीज की लिए खतरनाक हो जाती है। यदि ब्लड शुगर नियन्त्रित न रहे तो यह हार्ट, ब्लड वेसल्स, किडनी, पैर और आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है।

ऐसे में इसकी जांच कर इसके लेवल का पता लगाना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

डायबिटीज कैसे होता है ?

हम जब भी अपना भोजन ग्रहण करते है तो अंदर जाकर उस भोजन से ग्लूकोज़ निकलने लगता है। उसी समय पेंक्रिआज नामक ग्रंथि से इंसुलिन नामक हॉर्मोन निकलता है। जिसकी सहायता से ग्लूकोज़ रक्त में मिल कर ऊर्जा का निर्माण करती है।

जब कभी किसी वजह से इंसुलिन का श्राव कम हो जाता है तो रक्त , कोशिकाओं तक ग्लूकोज़ पहुंचाने में असमर्थ हो जाता है तथा ग्लूकोज़ ऊर्जा में परिवर्तित नहीं हो पाता । जिसके परिणामस्वरूप रक्त में ग्लूकोज़ इकठ्ठा होने लगता है तथा रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ने लगती है। तथा व्यक्ति को डायबिटीज होने की शिकायत होने लगती है।

इसके होने के कई कारण हो सकते है जिनमें अनुवांशिकता एवं खाने पिने में गड़बड़ी होना प्रमुख होता है। अतः व्यक्ति के लिए यह आवश्यक हो जाता है की वह खाने पिने में परहेज रखे जिससे वह डायबिटीज के खतरे से बचा रहे।

डायबिटीज के प्रकार :-


डायबिटीज मुख्यतः 3 प्रकार के होते है :-

टाइप 1 डायबिटीज –

इस प्रकार की डायबिटीज मुख्य रूप से बच्चों एवं युवाओं में देखा जाता है। इसलिए इसे किशोर मधुमेह के नाम से भी जाना जाता है।
यह डायबिटीज की ऐसी स्थिति है जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली पैनक्रियाज़ में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देती है जिन्हें बीटा कोशिकाएँ कहा जाता है।

टाइप 2 डायबिटीज –

यह अधिक उम्र के लोगों में होने वाली डायबिटीज है। इस प्रक्रिया में इंसुलिन सही प्रकार प्रतिक्रिया नहीं दे पाता है।

गर्भकाल डायबिटीज –

यह ऐसी डायबिटीज है जो एक चिकित्सकीय स्थिति है जो स्त्रियों में प्रेगनेंसी के समय देखने को मिलती है। यह प्रसव के बाद समाप्त हो जाता है।

डायबिटीज के लक्षण :-

  • बार-बार पेशाब (Urine) की समस्या होना।
  • अधिक भूख एवं प्यास लगनइ की समस्या होना।
  • सामान्य से बहुत ज्यादा थका हुआ महसूस करना।
  • बहुत ज्यादा प्यास लगना।
  • छोटे से छोटे घाव को भरने में भी बहुत समय लगना।
  • बार-बार पेशाब आने की समस्या होना।
  • वजन कम होना।
  • दृस्टि धुंदली होना।
  • त्वचा सम्बन्धी समस्या आना।
  • हांथों पैरों का सुन्न पड़ना।
  • महिलाओं में योनि में कैंडिड इंफेक्शन होने को खतरा हो जाता है।
  • डायबिटीज में व्यक्ति के अंदर संक्रमण से लड़ने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है जिससे कि मसूड़ें में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और मसूड़े कमजोर होकर दाँत ढीले होने की समस्या भी देखी जाती हैं।
  • उल्टी की इच्छा होने लगता हैं।

समस्या बढ़ने की स्थिति में :-

  • बेहोश होने की स्थिति आना।
  • दौरा पड़ने की समस्या होना।
  • व्यव्हार में बदलाव आना।
  • चीड़-चिड़ापन होना। इत्यादि।

डायबिटीज के कारण :-

डायबिटीज के प्रकार के आधार पर इसके कारण निर्धारित होते है। विभिन्न प्रकार के डायबिटीज के लिए विभिन्न कारण होने की सम्भावना होती है। जैसे

टाइप 1 डायबिटीज –


टाइप 1 डायबिटीज के लिए विषेशकर जींस ज़िम्मेदार होते हैं। विशेषकर अनुवांशिक कारणों से होने वाली इस प्रकार के डायबिटीज में इंसुलिन बनना कम हो जाता हैं। इसके अतिरिक्त पैन्क्रीअस के बीटा सेल्स पर प्रतिरक्षा प्रणाली के असर डालने के कारण इंसुलिन का निर्माण नहीं हो पता हैं।

टाइप 2 डायबिटीज –


टाइप 2 डायबिटीज के होने के कई कारण होते हैं अरन्तु इसका प्रमुख कारण लाइफस्टाइल होती हैं। इसके अतिरिक्त कुछ निम्नलिखित कारण होते हैं जिसके कारण डायबिटीज जैसी स्वास्थ्य समस्या होती हैं।
जैसे –

  • वजन में वृद्धि वजन बढ़ना डायबिटीज होने के प्रमुख कारणों में से एक हैं।
  • संतुलित आहार की कमी – संतुलित आहार की कमी से यह समस्या सामने आती हैं। पोस्टिक भोजन शरीर को स्वस्थ रखने में सहायता करता हैं एवं डायबिटीज जैसी बीमारी को होने से रोकता है।
  • व्यायाम की कमी – व्यायाम की कमी या शारीरिक गतिविधि कम करने के कारण यह समस्या होने की सम्भावना होती है।
  • इन्सुलिन की कमी – डायबिटीज होने की मुख्य वजह शरीर में इंसुलिन की कमी ही है। शरीर में इन्सुलीन कम बनने के कारन ग्लूकोस की मात्रा बढ़ने लगती है।
  • उम्र बढ़ने के कारण – कई बार उम्र बढ़ने के कारण भी यह समस्या देखने को मिलती है।
  • हाई कोलेस्ट्रॉल – कोलेस्ट्रॉल के बढ़ना भी शुगर होने के कारणों में से एक है।
  • हाई BP – रक्त चाप बढ़ने के कारण भी यह समस्या देखने को मिलती है।
  • तनाव के कारण – तनाव अच्छे से अच्छे स्वस्थ इंसान को भी बीमार कर सकता है। डायबिटीज होने का एक कारण तनाव भी होता है।
  • गर्भकाल के समय – कभी-कभी गर्भकाल के समय किसी किसी महिलाओं को डायबिटीज की शिकायत होने लगती है। यह समस्या बचे को जन्म देने के बाद धीरे-धीरे ख़त्म हो जाती है।

डायबिटीज को दूर करने के उपाय –


शुगर या डायबिटीज एक ऐसी समस्या है जो सामान्यतः यदि किसी को एक बार हो जाती है तो जड़ से खत्म नहीं होता है। साधारणतः शुरुआत में कुछ कुछ समस्या आने के कारण जब टेस्ट करवाया जाता है तो इसका पता चलता है।


डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो आपके शरीर के कई अंगों को प्रभावित करती है। और यदि यह बहुत अधिक बढ़ जाती है तो स्टॉक्स जैसी जानलेवा समस्या हो सकती है।


इसको निययन्त्रण में रखने के लिए कुछ बातों पर ध्यान रखना एवं कुछ निम्नलिखि उपायों को अपनाना आवश्यक होता है :-

  • समय समय पर जाँच एवं डॉक्टर की सलाह लें – डायबिटीज को नियंत्रण में रखने के लिए यह आवश्यक है की समय – समय पर इसकी जाँच करवाएँ एवं आवश्यकता होने पर डॉक्टर की सलाह भी लें।
  • व्यायाम की सहायता लें – डायबिटीज को नियंत्रित करने का एक सबसे महत्वपूर्ण उपाए व्यायाम है। कुछ व्यायाम की सहायता से डायबिटीज को बहुत हद तक नियंत्रण में रख सकते है।
  • पोस्टिक आहार की सहायता लें – पोस्टिक आहार प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ डायबिटीज को नियत्रण में रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ज्यादा से ज्यादा हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना डायबिटीज की समस्या में लाभकारी होता हैं।
  • कुछ आहार जो डायबिटीज में लाभकारी होते हैं वो निम्नलिखित हैं :-

  1. सब्ज़ियाँ जैसे – गाजर, हरी सब्जियाँ, मिर्च, ब्रोकोली ,टमाटर आलू, मक्का और हरी मटर शामिल हैं
  2. फल जैसे – संतरा, खरबूजा, जामुन, सेब, केला और अंगूर इत्यादि।
  3. अनाज – दिन में आपके अनाज का कम से कम आधा हिस्सा साबुत अनाज होना चाहिए। जैसे –
  4. गेहूं, चावल, जई, कॉर्नमील, जौ , छोले और विभाजित मटर और क्विनोआ इत्यादि।
  5. प्रोटीन
  6. दुबला मांस , त्वचा के बिना चिकन या टर्की , मछली , अंडे इत्यादि।
  7. मेवे और मूँगफली
  8. डेयरी पदार्थ जैसे – जिसमें वासा की मात्रा कम हो। जैसे दूध या लैक्टोज मुक्त दूध, दही , पनीर इत्यादि

  • कुछ घरेलु उपायों को अपना कर :- डायबिटीज को नियंत्रण में रखने के कई घरेलु उपाय जो अत्यंत लाभकारी होते हैं।जैसे –

  1. नीम की पत्तियों का काढ़े के रूप में या पाउडर के रूप में प्रयोग करके बहुत लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
  2. मैथी के दाने का पाउडर बनाकर या रात भर भिंगों कर सुबह खली पेट उसका पानी पिने से भी इसमें बहुत लाभ पहुँचता हैं।
  3. करेले का जूस डायबिटीज के लिए बहुत असरदार होता हैं।
  4. जामुन को खाने या उसके बीज को सूखा कर उसका पाउडर बनाकर सुबह सेवन करना भी लाभकारी होता हैं।

Vajan Badhna Kaise Roken?

वजन बढ़ना क्या होता है ? वजन बढ़ने के कारण, नुकसान एवं उपाए। वजन बढ़ने से होने वाली बीमारियाँ।

वजन बढ़ने का अर्थ शरीर में एक्स्ट्रा फैट या वसा का जमा होना है। यह स्थिति तब बनती है जब विभिन्न भोज्य एवं पेय पद्धार्थों द्वारा प्राप्त की गई ऊर्जा की मात्रा ,जीवन की विभिन्न गतिविधियों , शारीरिक प्रक्रियाओं एवं व्यायाम द्वारा खर्च की गई ऊर्जा की मात्रा की तुलना में कम होती है।

व्यक्ति द्वारा अधिक कैलोरीज़ वाले पदार्थ का सेवन करने की वजह से शरीर के विभिन्न अंगों में वसा का जमाव होने लगता है। जिसके कारण व्यक्ति में मोटापा होने लगता है साथ ही यह सेहत पर भी बुरा असर डालता है एवं विभिन्न बिमारियों को भी बढ़ावा देता है।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार व्यक्ति में यदि एक हफ्ते में 5 पाउंड (2.2 किलोग्राम) से ज्यादा एवं एक दिन में 2 से 3 पाउंड (1 से 1.5 किलो) वजन में वृद्धि हो रही हो तो यह हार्ट फेल होने की स्थिति को दर्शाता है।

वजन की मापतौल ( बी.ऍम.आई ) अर्थात बॉडी मास इंडेक्स द्वारा की जाती है। इसके अनुसार शरीर की ऊँचाई की तुलना में वजन मापा जाता है। उस तुलनात्मक माप-तौल में वजन का बढ़ना व्यक्ति में मोटापा को प्रदर्शित करता है।

किसी भी व्यक्ति के वजन बढ़ाने के कई कारण हो सकते है। कभी व्यक्ति द्वारा अपनाई गई खराब जीवनशैली के कारण और कभी विभिन्न स्वास्थ्य कारणों से व्यक्ति को वजन बढ़ने की समस्या का सामना करना पड़ता है।

व्यक्ति में वजन वृद्धि के करणों को 2 भाग में विभाजित किया गया है:-
१) चिकित्सकीय कारण
२) गैर चिकित्स्कीय कारण

वजन बढ़ने के कुछ चिकित्सकीय कारण होते है जो किसी बीमारी द्वारा या आपके द्वारा ली जा रही किसी दवा के कारण भी हो सकता है। जिसको दूर करके वजन वृद्धि पर नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है।

इन कारणों को हम निम्न प्रकार से देख सकते है :-

१) थाइरोइड की समस्या के कारण :– थाइरोइड एक प्रकार का हॉर्मोन होता है । जिसके कम श्राव से (हाइपोथायरायडिज्म) नामक समस्या होती है। इस समस्या के कारण शरीर में चपाचय की समस्या धीमी पड़ जाती है जिसके कारण वजन वृद्धि की समस्या होने लगती है।
आज के समय में यह समस्या आम हो गई है। इसके कारण मांसपेशियों में दर्द ,अनियमित मासिक धर्म और कब्ज, ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता, थकान, ठंड इत्यादि जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है।

२) PCOS की समस्या होने पर :- PCOS अर्थात पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम महिलाओं में होने वाली बहुत ही सामान्य सी समस्या है। इसमें महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन नामक हॉर्मोन का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है।

इन हॉर्मोन्स के असंतुलित होने के कारण महिलाओं को विभिन्न समस्या का सामना करना पड़ता है जिनमे सबसे बड़ी समस्या अंडाशय में सिस्ट का बनना होता है।

इसके अतिरिक्त मासिक धर्म चक्र में अनियमितता , प्रजनन क्षमता में कमी , ह्रदय सम्बन्धी रोग इत्यादि जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है।

३) औषधियों का असर :- कई प्रकार की ऐसी दवाएं होती है जिनके प्रयोग से व्यक्ति में वजन वृद्धि की समस्या सामने आने लगती है। स्टेरॉयड (कॉर्टिकोस्टेरॉइड) गोलियों ,इंसुलिन इत्यादि के लम्बे समय तक प्रयोग करने से व्यक्ति ज्यादा भूख लगने लगती है जिसकी वजह से वजन बढ़ने जैसी समस्या देखने को मिलती है।

व्यक्ति में वजन बढ़ने के कई कारण होते है जिनमें व्यक्ति द्वारा अपनाई जाने वाली जीवनशैली भी है।

वजन वृद्धि के गैर चिकित्सकीय कारणों को निम्नलिखित प्रकार से वर्णित किया जा सकता है :-

1. आनुवंशिकता- वजन वृद्धि का एक बहुत बड़ा कारण अनुवांशिकता भी है। यदि व्यक्ति के जिन में मोटापा होता है तो बिना किसी विशेष कारण के ही वजन में वृद्धि होने लगती है।

2. ख़राब खान-पान – व्यक्ति द्वारा अत्यधिक फ़ास्ट फ़ूड का सेवन करने से, अधिक कैलोरी वाले खाने का सेवन करने से खासकर शराब से मिलने वाली कैलोरी या चीनी युक्त पेय पदार्थ के प्रयोग से वजन में वृद्धि का सामना करना पड़ता है।

3. व्यायाम की कमी से – व्यायाम की कमी व्यक्ति में वजन वृद्धि के प्रमुख कारणों में से एक है। व्यायाम शरीर से कैलोरीज़ को ख़त्म करने में सहायक होती है।

4. पर्याप्त नींद ना लेना – किसी भी व्यक्ति के लिए रात की नींद पूरी करना अत्यंत आवश्यक है। रात की नींद यदि पूरी न हो तो व्यक्ति को कई बीमारियां घेरने लगती है। नींद की कमी वजन बढ़ाने के साथ-साथ व्यक्ति को शारीरिक एवं मानसिक रूप से भी स्वस्थ रखती है।

5 .लंबे समय तक बैठे रहना – अक्सर लम्बे समय तक लगातार बैठे रहना भी वजन बढ़ने के कारणों में से एक होता है। शरीर में कम गतिविधि होने की वजह वजन बढ़ने लगता है।

6. पानी की कमी – शरीर में पानी की कमी होने से डिहाइड्रेशन की समस्या होने लगती है। जिसके बाद बार-बार पानी पिने की इच्छा होने लगती है साथ ही भूख भी बढ़ जाती है।

व्यक्ति का वजन यदि बढ़ जाये तो शरीर में विभिन्न प्रकार की बीमारियां भी बढ़ने लगती है। यहां हम कुछ बीमारियों का उल्लेख कर रहे है जो वजन वृद्धि से होने वाली ऐसी बीमारी है जो आगे चल कर व्यक्ति की जान तक ले लेती है।

ऐसी कुछ बीमारियां निम्नलिखित है :-

1. डायबिटीज होने का खतरा :- वजन के बढ़ने से डायबिटीज होने का खतरा एक सामान्य समस्या बन जाती है। शुगर की समस्या कई बिमारियों के होने का कारन भी बन जाती है। व्यक्ति के शरीर में ब्लड शुगर में मौजूद ग्लूकोस की सामान्य मात्रा 70 – 120 होता है , परन्तु कई बार मोटापे के कारण यह ग्लूकोस की मात्रा बढ़ जाती है तथा डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।

2. हाई ब्लड प्रेशर होने का खतरा :– शरीर में ब्लड ग्लूकोज का नॉर्मल लेवल वैसे तो 70 से 120 मिलीग्राम/डीएल) से अधिक नहीं होना चाहिए, लेकिन कई बार मोटापे के कारण यह बढ़ जाता है, जिससे टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा रहता है। ओबेसिटी फैटी एसिड में वृद्धि का कारण बनता है, जो इंसुलिन प्रतिरोध को ट्रिगर करता है। ऐसे में मोटापे को काबू में ना रखा जाए, तो आपको डायबिटीज हो सकती है।

3.साँस लेने में तकलीफ :- वजन बढ़ने पर व्यक्ति को साँस लेने में तकलीफ होने लगती है क्योंकि शरीर में जमा वसा फेफड़ों को पूरी तरह फैलने से रोकती है। जिसके कारण मांसपेशियां स्वतंत्र रूप से कार्य करने में सक्षम नहीं हो पाती। यहां तक की व्यक्ति को दैनिक कार्य करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

4.फैटी लिवर :– वजन वृद्धि से व्यक्ति को फैटी लिवर होने का खतरा बढ़ जाता है। शरीर की अतिरिक्त चर्बी लिवर में जमने लगती है जिसके कारण यह समस्या सामने आती है। फैटी लिवर से लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर होने का भी खतरा बढ़ जाता है।

5.पीठ में दर्द :- मोटापा बढ़ने पर व्यक्ति को पीठ दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है। फैट अधिक जमा होने पर कमर पर प्रेसर पड़ने लगता है जिसके कारण व्यक्ति को पीठ और कमर दर्द की समस्या से लड़ना पड़ता है।

6.ह्रदय से जुड़ी बीमारियां :- वजन बढ़ने पर व्यक्ति को ह्रदय सम्बन्धी बीमारियां बढ़ने लगती है। व्यक्ति को दिल का दौरा या स्ट्रोक्स आने की सम्भावना बढ़ जाती है।

7. महिलाओं में PCOD या PCOS होने का डर होता है।

8. इसके कारण ह्रदय संभंधित होने वाली समस्या या बीमारियां होने का भी भय होता है।

वजन बढ़ना आज एक सामान्य समस्या बन गई है। आज जितना आसान वजन बढ़ना होता है उससे कहीं ज्यादा मुश्किल वजन का घटाना है। वजन घटाने के कुछ उपायों को निचे वर्णित किया गया है जिसका प्रयोग कर वजन को नियंत्रित किया जा सकता है।

  • व्यायाम का करें प्रयोग :- वजन नियंत्रित करने के लिए यह आवश्यक है की व्यायाम को अपने दैनिक क्रिया कलापों में शामिल किया जाये। नियमित तौर पर व्यायाम करने से वजन नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।
  • प्रोटीन डाइट का सेवन करें – प्रोटीन मांसपेशियों को हेल्दी रखने के लिए अत्त्यन्त जरूरी होता है। एक अच्छी प्रोटीन युक्त डाइट मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है एवं इससे कैलोरी बर्न होने में भी मदद मिलती है। अतः वजन कम करने के लिए प्रोटीन युक्त खाने की आवश्यकता होती है।
  • भरपूर पानी पियें – वजन को कंट्रोल में रखने के लिए खुद को हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी होता है। साधारणतः एक व्यक्ति को एक दिन में ४ लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इसके साथ जल युक्त फलों का भी सेवन करना लाभकारी होता है।
  • अच्छी नींद लें :- अच्छी नींद अच्छी सेहत के लिए अत्यंत आवश्यक है। अछि नींद वजन घटने में भी सहायक होती है।
  • घरेलु उपायों का करें प्रयोग :– वजन घटाने के लिए कई घरेलु उपाए है जिनकी सहायता से वजन को नियंत्रित रखा जा सकता है।
  • पोस्टिक भोजन एवं संतुलित आहार ले – संतुलित आहार एवं पोस्टिक भोजन वजन नियंत्रित करने में सहायता करता है।

ओपन हार्ट सर्जरी ( Open Heart Surgery) 

ओपन हार्ट सर्जरी ( Open Heart Surgery) :-

ओपन हार्ट सर्जरी हार्ट से जुड़ी बिमारियों से सम्बंधित होती है। यह एक तरह की ऐसी सर्जरी है जिसमें  चीरा लगा कर छाती को खोला जाता है तथा दिल की मांसपेशियों की, धमनियों की तथा वाल्व की सर्जरी की जाती है।

जैसे-जैसे विज्ञान प्रगति की ओर जा रहा है चिकित्सा क्षेत्र में भी कई प्रकार के बदलाव देखने को मिल रहे है। आज ह्रदय की बड़ी से बड़ी बीमारी के इलाज  के लिए यह आवश्यक नहीं है की चीरा लगाया जाये।

एक छोटे से छेद के द्वारा भी आज के समय में बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज संभव हो गया है। यही कारण है की आजकल लोग ओपन हार्ट सर्जरी से दूर भाग रहे है। आजकल लोगों का रुझान  ओपन हार्ट सर्जरी की ओर से हटता जा रहा  है ।

ओपन  हार्ट सर्जरी खास तौर पर कोरोनरी दिल की बीमारी से ग्रसित  व्यक्ति की की जाती है।  कोरोनरी ह्रदय रोग ऐसा रोग है जिसमें व्यक्ति की धमनियों के भीतर एक पदार्थ जमने लगता है तथा जिसके कारण रक्त का प्रवाह ह्रदय तक नहीं जा पता है। और व्यक्ति में हार्ट अटैक होने की सम्भावना हो जाती है।  

नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टिट्यूट ( (NHLBI) के अनुसार कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्टिंग (CBAG) ओपन हार्ट सर्जरी का सबसे सामान्य प्रकार है जो कि विशेषकर  वयस्कों पर किया जाता है।

ओपन हार्ट सर्जरी कब की जाती है ? ( When is open heart surgery done?)

कोरोनरी हृदय रोग वाले लोगों के लिए बाईपास सर्जरी आवश्यक है। कोरोनरी हृदय रोग तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों को रक्त और ऑक्सीजन प्रदान करने वाली वाहिकाएं सख्त हो जाती  है तथा फैटी पदार्थ कोरोनरी धमनियों की दीवारों पर चिपक जाती है ।

जिससे  रक्त का निकलना मुश्किल हो जाता है। जब व्यक्ति के ह्रदय  तक रक्त  ठीक से  नहीं पहुंच पाता है, तो व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ सकता है।

ओपन हार्ट सर्जरी क्यों करते है? (Why is open heart surgery done?)

  • हार्ट वोल्व को बदलने के लिए  –  हृदय के वाल्वों  (Heart valve) की मरम्मत करना या उन्हें रिप्लेस करने के लिए भी ओपन हार्ट सर्जरी  का प्रयोग किया जाता है। 
  • हार्ट के खराब हिस्सों की मरम्मत के लिए – ओपन हार्ट सर्जरी का प्रयोग दिल के क्षतिग्रस्त या खराब हिस्सों की मरम्मत करने के लिए भी किया जाता है।   
  • दिल में मेडिकल डिवाइस फिट करने के लिए – हार्ट में मेडिकल डिवाइसेस को फिट करना जो दिल को ठीक से धड़कने में मदद करते है, के लिए ओपन हार्ट सर्जरी की मदद ली जाती है।
  • हार्ट ट्रांसप्लांट के उद्देस्य से –  हार्ट ट्रांप्लांट के उद्देश्य से भी ओपन हार्ट सर्जरी  की आवश्यकता पड़ती है।  
  • कोरोनरी हृदय रोग की स्थिति में –  जब किसी व्यक्ति को कोरोनरी हृदय रोग होता है, तब भी डॉक्टर उस व्यक्ति को ओपन हार्ट सर्जरी कराने की सलाह देते हैं।

ओपन हार्ट सर्जरी कैसे की जाती है ?(How is open heart surgery performed?)

किसी भी प्रकार की सर्जरी की विधि उसकी तैयारी से लेकर उसके पूर्ण होने तक में शामिल होती है। ओपन हार्ट सर्जरी न्यूनतम 5 – 6 घंटे तक चलने वली सर्जरी है।

इस प्रकार की सर्जरी की क्रियाविधि को निम्नलिखित प्रकार से विस्तृत है :-

  • सबसे पहले डॉक्टर मरीज़ से उसकी पूरी जानकारी मांगते है। उसकी पहले से चल रही कोई बीमारी या उसकी दवाओं की जानकारी। 
  • डॉक्टर मरीज से यह भी सुनिश्चित करता है की उसे किसी दवा से किसी प्रकार की कोई एलेर्जी तो नहीं है।  
  • सर्जरी के कुछ दिन पहले से ही मरीज को खाने -पीने में परहेज करने की सलाह दी जाती है।  
  • सर्जरी के पहले मरीज़ का खाना पीना बंद कर दिया जाता है। उसे आरामदायक कपड़े दिए जाते है। 
  • ओपन हार्ट सर्जरी के लिए सर्जन मरीज को एनेस्थीसिया देता है , जिससे ऑपरेशन के समय पेशेंट सोता रहे और उसे दर्द का एहसास न हो । 
  • उसके बाद मरीज़ की छति में 8-10 इंच का चीरा लगाया जाता है। 
  • सर्जन पेशेंट के दिल तक पहुंचने के लिए ब्रेस्टबोन ( breastbone ) को खोलता है।  
  • जब हार्ट दिखाई देने लगता है तो मरीज़ के हार्ट को बाईपास मशीन से जोड़ दिया जाता है क्योंकि इस स्टेज पर मरीज़ का हार्ट काम करना बंद कर देता है। 
  • फिर सर्जन मरीज़ की ब्लॉक्ड आर्टरीज़ के लिए अलग से हेअल्थी आर्टरीज़ से जोड़ देता है। 
  • सर्जन ब्रेस्टबोन को पुनः जोड़ने के लिए वायर का उपयोग करते है। एवं उसे जोड़ने के बाद वायर को अंदर ही छोड़ देते  है। 
  • अंत में चीरे को सील दिया जाता है। 

ओपन हार्ट सर्जरी के बाद की अपनाई जाने वाली सावधानियां ( Precautions to be taken after open heart surgery) :-

  • कट की देखभाल :- जैसा कि ऊपर बताया गया है, इस सर्जरी के दौरान व्यक्ति के शरीर में एक कट बनाया जाता है। इस कट को भरने में कुछ समय लगता है इसलिए व्यक्ति को इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए ताकि उसे किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
  • दर्द कम करना :- किसी भी अन्य सर्जरी की तरह, ओपन हार्ट सर्जरी  के बाद व्यक्ति को दर्द होता है। व्यक्ति को किसी भी प्रकार का दर्द होने पर दर्द निवारक दवा लेनी चाहिए, लेकिन यह कदम डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए।
  • पर्याप्त नींद लेना :- विशेषज्ञों द्वारा नींद को एक स्वस्थ व्यक्ति की पहचान बताया गया है, इसीलिए वे सभी लोगों के लिए पर्याप्त नींद (लगभग 8 घंटे) लेने पर जोर देते हैं। यह इस सर्जरी से गुजरने वाले व्यक्ति पर भी लागू होता है क्योंकि इससे उसे तेजी से ठीक होने में मदद मिलती है।
  • पौष्टिक भोजन करना :- अगर किसी व्यक्ति की हाल ही में ओपन हार्ट सर्जरी हुई है तो उसे अपने खान-पान पर पूरा ध्यान देना चाहिए। एक संतुलित आहार के फायदे बहुत होते है। यह किसी भी प्रकार के घाव को भरने में सहायता करते है। व्यक्ति को केवल पौष्टिक भोजन एवं संतुलित आहार का ही सेवन करना चाहिए क्योंकि यह भोजन उसके शरीर पर आवश्यक ऊर्जा की खपत करता है, जिससे उसे जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है।
  • धूम्रपान न करें :- यह तथ्य सभी जानते हैं कि धूम्रपान का हमारे स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और यह कई बीमारियों (फेफड़ों का कैंसर) का कारण भी बनता है। इस कारण ओपन हार्ट सर्जरी  कराने वाले व्यक्ति को धूम्रपान नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे उसकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।
  • व्यायाम :- इस सर्जरी के बाद शीघ्र स्वस्थ होने में व्यायाम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है क्योंकि यह शरीर की मांसपेशियों को खोलता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। इसी वजह से अगर किसी व्यक्ति की हाल ही में ओपन हार्ट सर्जरी हुई है तो उसे एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना :- इस सर्जरी के बाद व्यक्ति को अपने शरीर का पूरा ध्यान रखना चाहिए और उसे अपने उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना चाहिए क्योंकि ये दोनों बढ़ते या घटते हैं। इनमें से किसी एक के बढ़ने से व्यक्ति के हृदय पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न ):-

/ ओपन हार्ट सर्जरी में कितना पैसा खर्च होता है?

ओपन हार्ट सर्जरी  का  खर्च  विभिन्न स्थानों पर भिन्न – भिन्न होता है।अगर किसी प्राइवेट हॉस्पिटल की देखे तो ओपन हार्ट सर्जरी का खर्च कम से कम 5 – 6 लाख रूपए तक होते है। वहीँ अगर सरकारी हॉस्पिटल की बात करे तो वहां 15000 – 1 लाख तक का खर्च होता है।     

/ हार्ट सर्जरी कितनी सफल होती है?

इस बात की 100 प्रतिशत  पुष्टि करना मुश्किल है की ओपन हार्ट सर्जरी कितनी सफल होती है।  परन्तु एक रिपोर्ट के अनुसार जितनी भी हार्ट सर्जरी करी जाती है, जैसे कोरोनरी बाईपास सर्जरी (25 प्रतिशत), बच्चों की हार्ट सर्जरी (20 प्रतिशत), वाल्व रिप्लेसमेंट (50 प्रतिशत) व एन्यूरिज्म (5 प्रतिशत) तक किए जा रहे हैं, जिनमें सफलता की दर 95 प्रतिशत फीसदी तक  है।   

/ क्या ओपन हार्ट सर्जरी का कोई साइड इफेक्ट है?

ओपन हार्ट सर्जरी के साधारणतः कोई बड़े दुष्प्रभाव नहीं देखे गए है।  परन्तु सर्जरी के बाद पेशेंट को कुछ तकलीफों का सामना करना पड़ता है जो नम्नलिखित है:- 

सूजन आना – ग्राफ्टिंग ( यह एक ऐसी सर्जरी है, जो कोरोनरी आर्टेरी या हृदय धमनियों के बिच से हृदय में रक्त के प्रवाह को तेज़ करती है। ) के दौरान मरीज के पैरों में चीरा लगाया जाता है जिससे बाद में पैरों में सूजन की समस्या आना आम बात हो जाती है।

भूख में कमी आना – सर्जरी के कुछ दिनों बाद, मरीज़ को स्वाद और भूख में कमी आने की समस्या आती है ।

मिचली आना – व्यक्ति को किसी किसी स्थिति  में मतली आने की समस्या देखि जाती है।  

नींद न आने की समस्या –  सर्जरी के बाद नींद न आने की या बार- बार नींद टूटने की समस्या सामान्य है।  

कब्ज़ होना – सर्जरी के बाद कब्ज़ होना बहुत आम बात है ,जो फाइबर युक्त खाना खाने से दूर हो जाती है। 

गांठ महसूस होना – कभी – कभी चीरा लगे स्थान पर गांठ महसूस होती है जो संक्रमण का संकेत होता है। 

सर्जरी के बाद, कभी-कभी मरीज़ की  छाती से क्लिक की आवाज आती है। यदि वह खुद ठीक न हो , तो डॉक्टर को दिखा लेना  चाहिए।

/ हार्ट सर्जरी कितनी सुरक्षित है? 

ओपन हार्ट सर्जरी में  जेनेरल एनेस्थीसिया का प्रयोग किया जाता है । इसलिए मरीज को सर्जरी  के दौरान दर्द नहीं होता है, लेकिन एनेस्थीसिया का असर खत्म होने के बाद सीने में दर्द महसूस होता  है। यह एक बड़ा ऑपरेशन  हैं तो इसमें जोखिम की सम्भावना काफी हद तक होती  है। अक्सर रिकवरी में कुछ समय भी लग जाता  है। परन्तु डॉक्टर के द्वारा सुझाये गए आदेशों का पालन कर के जल्दी ठीक होते है। 

/ ओपन हार्ट सर्जरी से पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगता है?

रिकवरी में कितना समय लगेगा यह सर्जरी के प्रकार, उसकी  जटिलता और सर्जरी के  पहले के व्यक्ति के सामान्य स्वास्थ्य पर निर्भर करता  है। ओपन हार्ट सर्जरी  प्रक्रिया से ठीक होने में 1 -2 सप्ताह तक का समय लग जाता है और कभी-कभी अधिकतम 1 महीने तक का समय भी लग सकता है।