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प्रतिरक्षा प्रणाली को कैसे मजबूत करें ?

प्रतिरक्षा प्रणाली जिसे हम रोग प्रतिरोधक छमता एवं इम्युनिटी सिस्टम के रूप में भी जानते हैं। यदि व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है तो विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया , वायरस, फंगस जो हमारे शरीर को नुक्सान पहुंचाते है उनसे शरीर की रक्षा करता है। यह बिमारियों , हानिकारक पदार्थो एवं कोशिका परिवर्तन इत्यादि से शरीर की रक्षा करता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली विभिन्न कोशिकाओं ,उत्तकों एवं विशेष प्रकार के प्रोटीन से निर्मित एक जटिल प्रणाली है। यह कोशिकाओं , उत्तकों एवं अंगों का एक नेटवर्क है जो शरीर को निक्सन पहुंचने वाले रोगाणुओं , कीटाणुओं इत्यादि से हमारी रक्षा करता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली एक ऐसी व्यवस्था है जो विभिन्न प्रकार के संक्रमण से शरीर की रक्षा करते हैं। कभी – कभी हमारे शरीर में कई प्रकार के टॉक्सिन्स बन जाते हैं जिसका कारण कभी बैक्टीरिया होता हैं तो कभी वायरस। इन टॉक्सिन्स के कारण शरीर में विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती है।

प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर को संक्रमण से बचाती है और इसमें कोशिकाओं, रसायनों, ऊतकों और अंगों का एक जटिल नेटवर्क शामिल होता है। प्रतिरक्षा प्रणाली बैक्टीरिया, वायरस और कवक जैसे ‘आक्रमणकारियों’ के साथ-साथ कैंसर कोशिकाओं जैसी असामान्य कोशिकाओं को पहचानती है, और फिर शरीर को उनसे लड़ने में मदद करती है।

हमारे शरीर में कई अंग हैं जो मिलकर प्रतिरक्षा प्रणाली का निर्माण करते हैं।
जैसे –
त्वचा – त्वचा हमारे लिए रोग प्रतोरिधक का काम करती है। यह बाहरी कीटाणुओं को शरीर में जाने से रोकती है।
श्लेष्मा झिल्ली – यह एक ऐसी परत होती है जो बलगम जैसे पदार्थ बनाते हैं जो कीटाणुओं को फंसा लेते हैं तथा उसे शरीर के अंदर जाने से रोकते हैं।
श्वेत रक्त कोशिकाएं – यह कीटाणुओं से लड़ती है। यह विभिन्न प्रकार के उत्तकों का निर्माण करती है जो रोग प्रतिरोधी का काम करती है।
बी-सेल्स – यह एक प्रकार का विशिस्ट प्रोटीन होता है जिन्हें रिसेप्टर कहा जाता है। यह एंटीजेंस जो एक प्रकार के खतरनाक तत्व एवं कण होते हैं ,जिसमें वायरस बैक्टीरिया और दूसरे विषैले तत्व विधमान होते हैं, को पहचान कर उन्हें नष्ट करते हैं।

इनके अतिरिक्त प्रतिरक्षा प्रणाली के कई और भी महत्वपूर्ण कार्य है जो निम्नलिखित है :-

  • ऐसे तत्व जो रोग उत्पत्ति का कारण बनते हैं उनको फ़साने एवं हटाने का कार्य करते हैं।
  • शरीर के अंदर विभिन प्रकार के रोग उत्त्पन्न करने वाले कोशिकाओं के विरुद्ध लड़ते हैं एवं उनकी वृद्धि को रोकते हैं।
  • यह संक्रमण होने के पहले संक्रमण करने वाले एंटीजन को ढूंढ कर नष्ट करती है।
  • यह आपके शरीर की हुई छती को ठीक करने का कार्य करती है।
  • यह यह भी सुनिश्चित करती है यदि शरीर के अंदर कोई हानिकारक तत्त्व पहले से उपस्थित है तो वो शरीर को कितना नुकसान कर सकते हैं।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा जिन तत्वों से शरीर की रक्षा की जाती है वो निम्नलिखित है :-
    वायरस
    बैक्टीरिया
    परजीवी
    कवक ( Fungi )
    कैंसर टिश्यू।

प्रतिरक्षा प्रणाली का कमज़ोर होना आप पर बहुत तरीकों से असर डालता है। इसके आभाव में आप बार-बार बीमार पड़ते हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली के कमज़ोर होने की स्थिति में आपको कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके कई लक्षण होते हैं जिसकी जानकारी प्राप्त कर आप यह जान सकते हैं की आपको अपनी इम्युनिटी सम्बन्धी कितनी समस्या हैं।

अतः कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कुछ लक्षण निम्नलिखित हैं :-

1. पेट सम्बन्धी समस्या :-

प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर होने पर सबसे ज्यादा समस्या पेट की आती हैं। व्यक्ति को हमेशा गैस बनने , पेट में दर्द रहने , दस्त होने इत्यादि जैसी समस्या का सामना करना पड़ता हैं। एक शोध के अनुसार यह ज्ञात किया गया हैं की व्यक्ति की 70% प्रतिरक्षा प्रणाली पेट में ही स्थित होती हैं। पेट में कुछ लाभकारी बैक्टीरिया भी मौजूद होते हैं जो हानिकारक बैक्टीरिया को ख़त्म कर संक्रमण से बचाते हैं।

2. हमेशा सर्दी की शिकायत रहना :

जिस व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर होती हैं। उसको ज़रा सा मौसम में परिवर्तन होने पर शारीरिक समस्या से जूझना पड़ता हैं। साधारणतः सर्दी जैसी शिकायत 7 – 10 दिन में समाप्त हो जाते हैं परन्तु यदि व्यक्ति हमेशा ही इसकी समस्या से जूझता रहता हैं तो यह इम्युनिटी कमज़ोर होने के कारण होता हैं।

3 . हमेशा थकावट मौजूद होना :-

व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए यह आवश्यक हैं की वह प्रतिरक्षा प्रणाली को कैसे मजबूत करें इसकी विस्तृत जानकारी प्राप्त करना आवश्यक हैं।
जब व्यक्ति में प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर हो जाती हैं तो उसे हमेशा थकावट महसूस हैं। शरीर हमेशा बैक्टीरिया के खिलाफ लड़ते रहता जिसके कारण व्यक्ति को हमेशा थकान महसूस होती हैं एवं वह चिड़चिड़ा सा रहने लगता हैं ।


4. बार-बार संक्रमण होना –

व्यक्ति में यदि प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर होने की समस्या होती हैं तो उसे बार – बार संक्रमण होने की समस्या बानी रहती हैं। कुछ ऐसे संक्रमण से होने वाली समस्या हैं जो यदि जो यदि बार बार हो तो यह निश्चित होता हैं की व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर हैं। उनमें से कुछ समस्या निम्नलिखित हैं :-

  • व्यक्ति को बार – बार न्यूमोनिया जैसी समस्या का सामना करना पड़ता हैं।
  • वर्ष में बार – बार कान में संक्रमण की समस्या का होना।
  • बार – बार एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करना।
  • व्यक्ति को साइनस की शिकायत होना।

प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के उपाए :-


जब भी किसी बीमारी से लड़ने की बात आती हैं तो सबसे पहले यह बात आती हैं की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को कैसे मजबूत करें ? इसके उत्तर के लिए हम यहां आपको कुछ जानकारी दे रहे हैं जिसका प्रयोग कर आप अपनी रोग प्रतिरोधक छमता को बढ़ा सकते हैं। एवं शरीर को बिमारियों से लड़ने के लिए सक्षम बना सकते हैं।
अतः अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को कैसे मजबूत करें ? या रोग प्रतिरोधक छमता को बढ़ाने के उपाए निम्नलिखित हैं :-

अच्छी जीवन शैली का करें पालन :-

यदि किसी व्यक्ति को अपनी इम्युनिटी को मजबूत करने की आवश्यकता है तो उसके लिए यह आवश्यक है की वह सबसे पहले अपनी जीवन शैली को सुधारने का प्रयास करें।अर्थात अपने कार्यों को समय से करने का प्रयास करें।

पौस्टिक एवं संतुलित आहार लें :-

संतुलित आहार के फायदे में प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाना भी आता है। व्यक्ति के लिए पौस्टिक एवं संतुलित आहार ग्रहण करना अत्यंत आवश्यक है। जिसमें विभिन्न प्रकार के फल , सब्जियां , नट्स इत्यादि सभी पौस्टिक आहार पर्याप्त मात्रा में हों। आहार में कम फैट वाले खाने का सेवन करना आवश्यक है। कम तला एवं कम फैट वाले भोज्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते है।

नियमित व्यायाम करें :-

प्रतिरक्षा प्रणाली तब तक मजबूत नहीं हो सकती जब आप उसके लिए परिश्रम न करें। विभिन्न प्रकार के योग एवं व्यायाम के द्वारा भी अपनी इम्युनिटी को बढ़ाया जा सकता है। प्रतिरोधक छमता को बढ़ाने के लिए कुछ व्यायाम निम्नलिखित है :-
भुजंगासन , सेतु बंधासन , बालासन, हलासन इत्यादि।

विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें :-

विटामिन C रोग प्रतिरोधक छमता को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन C सभी प्रकार के खट्टे खाद्य पदार्थ से प्राप्त होता है। विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थ निम्नलिखित है जिसका सेवन करना अत्यंत आवश्यक है :-

  • संतरा
  • निम्बू
  • दही
  • गोभी
  • अदरक
  • बादाम
  • ब्रोकली
  • कीवी
  • शिमला मिर्च
  • आम
  • पपीता
  • टमाटर
  • स्ट्रॉबेरी इत्यादि

शराब सिगरेट का सेवन करने से बचे –

व्यक्ति की इम्युनिटी मजबूत करने के प्रयास में शराब सिगरेट बहुत ही हानिकारक होते हैं। सिगरेट व्यक्ति की इम्युनिटी का बहुत नुकसान करते है एवं उसे आंतरिक रूप से कमज़ोर करते है।

पर्याप्त नींद लेने की आवश्यकता है –

शरीर को अंदर से मजबूत करने के लिए नींद पूरी करना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए यह आवश्यक है की व्यक्ति पूरी नींद ले।

वजन संतुलित रखें –

वजन संतुलित रहने से व्यक्ति में कार्यं करने की इच्छा बनी रहती है। वजन बढ़ना कैसे रोकें यह जानने के लिए इससे होने वाले नुकसान को जानना भी आवश्यक होता है। अतः प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए यह आवश्यक है की वजन नियंत्रण में रखें और वजन कम होने से व्यक्ति किसी प्रकार के कार्य करने में सक्षम हो पाता है। वजन बढ़ने से विभिन्न प्रकार की बीमारियां होने का भय बना रहता है।

संतुलित आहार के फायदे ..

आहार क्या है ?

मनुष्य द्वारा ग्रहण किया गया हर वो खाद्य पदार्थ जिसको ग्रहण करने से शरीर को पोषण प्राप्त होता है , आहार कहलाता है। आहार मनुष्य की मूल आवश्यकता है। आहार के आभाव में व्यक्ति का जीवन संभव ही नहीं है। आहार व्यक्ति की भौतिक आवश्यकताओं के साथ- साथ सामाजिक एवं भावनात्मक आवश्यकता की भी पूर्ति करता है।

आहार के महत्व –

आहार व्यक्ति के जीवन में बहुत अधिक महत्त्व रखता है। अच्छे स्वास्थ्य और पोषण के लिए स्वस्थ आहार की आवश्यकता होती है। यह आपको कई बिमारियों से बचाता है जो आपके लिए अत्यंत हानिकारक हो सकता है। यह आपको ह्रदय रोग , मधुमेह , कैंसर जैसी खतरनाक बिमारियों से बचाने में सहायता करता है।

आहार के प्रकार :-

मनुष्य द्वारा ग्रहण करने वाले सभी खाद्य पदार्थो को आहार कहा जाता है। आहार को कुछ प्रकार में विभाजित किया गया

है।

जो निम्नलिखित है :-

  • अल्पाहार
  • फलाहार
  • निराहार
  • मांसाहार
  • शाकाहार
  • सर्वाहार
  • नाहार

संतुलित आहार क्या है ?

वैसे तो आहार कई प्रकार के होते हैं। परन्तु सभी आहार स्वास्थ्य के लिए लाभकारी नहीं होते हैं। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार अर्थात एक उचित आहार की आवश्यकता होती है जो शरीर के लिए लाभकारी हो एवं स्वास्थ्य को सुधारने में भी लाभकारी हो। एक संतुलित आहार व्यक्ति के लिए शरीर में आवश्यक हॉर्मोन्स की मात्रा को निर्धारित करता है। जिसकी सहायता से व्यक्ति का प्रजनन स्वास्थ्य , यौन स्वास्थ्य एवं मानसिक स्वास्थ्य इत्यादि स्थिर रहता है। अपने खाद्य पदार्थों में से स्वास्थ्य वर्धक खाद्य पदार्थों का चयन करना तथा सही अनुपात में उसका सेवन करना आपके आहार को गुणकारी एवं संतुलित बनाने का एक तरीका है।

एक स्वस्थ और संतुलित आहार आपके शरीर की ऊर्जा को बढ़ाता है एवं विभिन्न कार्य करने की शक्ति प्रदान करता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए खाद्य पदार्थों का सही मात्रा में चयन करना एवं सही मात्रा में खाना आहार को गुणकारी बनाता है। एक संतुलित आहार में गुणकारी तत्वों की मात्रा निश्चित होती है। उस आहार में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा 60-70%, प्रोटीन 10-12% और वसा 20-25% तक उपस्थित होती है।

संतुलित आहार के महत्त्व

आज के समय में अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।अच्छे स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए यह आवश्यक है की आप स्वस्थ एवं संतुलित आहार ग्रहण करें।

एक संतुलित आहार आपको विभिन्न प्रकार के रोगों जैसे ह्रदय रोग , मधुमेह और कैंसर जैसी कई बिमारियों से बचाता है।संतुलित आहार के लिए पर्याप्त रूप से कार्बोहायड्रेट , प्रोटीन एवं वसा इत्यादि जैसे स्वस्थ आहार को पर्याप्त मात्रा में ग्रहण करना आवश्यक होता है। क्योंकी संतुलित आहार शरीर को पोषण प्रदान करते है।

संतुलित आहार हमारे वजन को नियंत्रित करने के साथ – साथ सेहत को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संतुलित आहार शरीर में रोग प्रतिरोधक छमता बढ़ाने में भी सहायक होता है जिससे बिमारियों के होने का खतरा कम हो जाता है।

संतुलित आहार के तत्त्व :-

संतुलित आहार कुछ तत्वों के मिलने से बनता है जो शरीर की दुर्बलता को कम करने में सहायक होता है एवं शरीर की रोग प्रतिरोधक छमता को बढ़ाता है। जिससे शरीर में बिमारियों के होने का खतरा कम हो जाता है।

संतुलित आहार में पाये जाने वाले 7 तत्त्व निम्नलिखित है :-

कार्बोहाइड्रेट –

कार्बोहइड्रेट शरीर के महत्वपूर्ण घटकों में एक है। एक व्यस्क व्यक्ति को औसतन रूप से लगभग 45 – 65 % कैलोरी की आवश्यकता होती है जो कार्बोहायड्रेट के रूप में प्राप्त होता है।

शरीर के सभी अंगों ,सेल्स एवं उत्तकों को ग्लूकोस की आवश्यकता होती है। यह ग्लूकोस कार्बोहायड्रेट के रूप में प्राप्त होता है।

कार्बोहइड्रेट की पूर्ति कुछ निम्न खाद्य पदार्थों के सेवन करने से प्राप्त होता है :-

  • अनाज,
  • फल,
  • सब्जियां
  • फलियां इत्यादि।

फाइबर –

फाइबर हमारे प्रतिरोधी छमता को बढ़ाने का मुख्य तत्त्व है। यह रेशेदार खाद्य पदार्थों में पाया जाने वाला तत्त्व है। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ , हमारे पाचन शक्ति को भी दुरुस्त करता है। फाइबर कब्ज़ के साथ-साथ कई बड़ी बिमारियों से भी हमारी रक्षा करता है।

फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ निम्नलिखित है :-

  • सब्जियां – कच्चा केला ,लौकी , कद्दू , ब्रोकली इत्यादि।
  • फल – सेब , कटहल , तरबूज , अनार
  • दाल – फलिया –
  • नट्स और सीड्स इत्यादि।

विटामिन –

शरीर के विकास के लिए विटामिन्स की आवश्यकता होती है। ये विटामिन्स शरीर के विभिन्न अंगों की जरुरत को पूरा करते है जैसे – आँखों की कमज़ोरी , दांतों की मजबूती ,हड्डियों को मजबूत करना इत्यादि। विकास की जरुरत पूरा करने के लिए 13 अलग-अलग प्रकार के विटामिन्स की जरुरत पड़ती है।

कुछ विटामिन्स युक्त खाद्य पदार्थ जिनमें विटामिन पर्याप्त मात्रा में पाई जाती है , निम्नलिखित है :-

  • ताज़े फल ,
  • सब्जियां
  • अंडे
  • प्लांट बेस्ड मिल्क फूड
  • पनीर
  • संतरे का रस, खासकर फॉर्टिफाइड संतरे का रस
  • मशरुम
  • दूध इत्यादि।

आयरन –

आयरन हमारे शरीर को स्वस्थ रखने वाले महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है। यह शरीर को सेहतमंद रखने में मदद करता है। हेल्दी डाइट अर्थात संतुलित आहार को फॉलो कर शरीर को कई समस्याओं से बचाया जा सकता हैं. भारत में महिलाओं में आयरन की कमी होना एक आम समस्या बन गई है। इसकी कमी से कई प्रकार की समस्या होने की सम्भावना होती है।

आयरन (Iron Rich Foods) की कमी से शरीर में होने वाली समस्याओं में – कमजोरी, थकान जैसी समस्यायें है साथ शरीर में खून की भी कमी हो जाती है। क्योंकि आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने का काम करता है। एवं इस हीमोग्लोबिन के साथ ही हमारे द्वारा सांस के साथ खींची गई ऑक्सीजन शरीर के सभी हिस्सों तक पहुंचता है। जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है।

शरीर में हो रहे आयरन की कमी को निम्न खाद्य पदार्थों की सहायता से पूरा कर सकते है। जैसे –

  • रागी
  • किशमिश
  • मसूर
  • सोयाबीन
  • करी पत्ते
  • सब्जियां
  • सोयाबीन
  • करी पत्ते
  • विटामिन सी से भरपूर फल

प्रोटीन :

प्रोटीन का सेवन , सेवन करने वालों के उम्र , वजन , लिंग इत्यादि को ध्यान में रख कर निर्धारित किया जाता है। व्यक्ति के अनुसार प्रोटीन की डाइट निर्धारित की जाती है।

प्रोटीन शरीर की वृद्धि के लिए आवश्यक तत्व है। इसके प्रभाव से आपकी बॉडी को बढ़ने उसकी छति पूर्ति करने एवं प्रभावी रूप से काम करने में सहायता मिलती है। अतः आपके डाइट में इस पोषक तत्व का होना अत्यंत आवश्यक होता है। प्रोटीन हमारे बालों के साथ- साथ हमारे स्किन , हॉर्मोन्स , एवं मसल्स के लिए भी आवश्यक होती है।

प्रोटीन शरीर को बीमारियों से लड़ने में सहायता करता है। अतः कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन कर हम शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा कर सकते है।

प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ निम्नलिखित है :-

  • अंडा
  • पिस्ता
  • सोया दूध
  • मूंगफल्ली
  • बादाम ग्रीक योगर्ट
  • अखरोट
  • एवोकैडो
  • ब्रोकली
  • हरी मटर
  • मीट
  • मछली
  • काजू इत्यादि।

फैट – :

फैट संतुलित आहार के तत्वों में महत्वपूर्ण है। परन्तु आवश्यकता से अधिक फैट भी शरीर के लिए हानिकारक होता है। शरीर को प्रतिदिन 25 – 35 % वसा की जरुरत पड़ती है। परन्तु संतृप्त वसा कुल फैट के 10 % से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

वसा की जरुरत उम्र एवं लिंग के हिसाब से अलग अलग होती है। महिलाओं एवं पुरुषों में वसा की जरुरत भीं भिन्न होती है। जैसे – 40 – 59 वर्ष तक की महिलाओं में 23 % – 33 % तक वसा की जरुरत होती है जबकि इसी उम्र में पुरुषों में 13% -24 % वसा की जरुरत होती है।

वहीँ 60- 79 वर्ष तक की महिलाओं में 24% – 35% एवं पुरुषों में 13% – 24% फैट की आवश्यकता होती है। कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते है जिसके सेवन से शरीर के लिए आवश्यक वसा की जरुरत पूरी हो जाती है। एवं जिनका पर्याप्त मात्रा में सेवन करना आवश्यक होता है :-

  • फैट वाली मछलियां जैसे सल्मोन , रोहू, पापलेट इत्यादि जैसी मछलियां।
  • एवोकाडो
  • फ्लैक्स सीड
  • डार्क चॉक्लेट
  • ड्राई फ्रूट्स
  • जैतून तेल
  • अंडे इत्यादि।

खनिज पदार्थ –

खनिज तत्त्व विभिन्न उपयोगी तत्वों के मेल से बना होता है। खाद्य युक्त खनिज पदार्थ में कुछ आवश्यक तत्व होते है जो शरीर के विकास के लिए एवं स्वस्थ रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

जैसे – कैल्सियम , मैग्नीशियम , आयरन, फॉस्फोरस , पोटासियम , सोडियम इत्यादि। इसमें मौजूद सभी तत्व शरीर की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करता है। जैसे कैल्शियम दांतों एवं हड्डियों को मजबूत करने के काम आता है।

खनिज पदार्थ युक्त भोज्य पदार्थ निम्नलिखित है:-

  • चोकर का आटा,
  • बाजरा,
  •  मक्खन,
  •  छिलके वाली दालें,
  • हरे मटर,
  • सभी सब्जियां,
  •  सभी फल,
  •  अण्डे की जर्दी,
  •  सोयाबीन,
  • सूखे फल इत्यादि।  

संतुलित आहार के फायदे :-

संतुलित आहार हमारे हसरीर को विभिन्न प्रकार से लाभ पहुंचाने का कार्य करते है। यह विभिन रोगों से लड़ने के लिए हमारे शरीर को सक्षम बनाते है। यह विभन्न बिमारियों से शरीर को बचाता है।
इसके अतिरिक्त भी इसके कई लाभ होते है जिनको निम्न प्रकार से देख सकते है :-

  • शरीर को ऊर्जा देने का कार्य करता है।
  • यह ह्रदय से सम्बंधित होने वाली बिमारियों से भी रक्षा करता है। एवं विभिन सर्जरी जैसे ओपन हार्ट सर्जरी इत्यादि से जल्दी उभरने में सहायता करता है।
  • यह कैंसर होने से रोकता है।
  • मूड को बूस्ट करने का भी कार्य करता है।
  • इसके द्वारा हड्डियों को भी मजबूती प्राप्त होती है।
  • यह वजन को बढ़ने से रोकने में भी सहायक होता है।
  • यह मस्तिष्क के रोगों से हमारी रक्षा करता है।
  • हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है।
  • पर्याप्त नींद लेने में सहायक होता है। जिसके फल स्वरुप आप खुद को स्वस्थ महसूस करते हैं।
  • यह महिलाओं में होने वाली समस्या PCOD एवं PCOS के होने की सम्भावना को भी कम करता है।

इनके अतिरिक्त भी संतुलित आहार के कई लाभ होते है जो हमारे स्वास्थय को लाभ पहुँचाता है।

निष्कर्ष :-

उपरोक्त लेख में हमने आपको आहार एवं आहारों में संतुलित आहार के विषय में जानकारी देने की कोशिश की है। इस लेख के माध्यम से आपने यह ज्ञात किया कोई भी आहार संतुलित आहार नहीं होता बल्कि पोषक तत्वों से भरपूर और पर्याप्त मात्रा से ग्रहण किये गए आहार ही संतुलित आहार होते है।

एक संतुलित आहार आपके शरीर को विभिन्न प्रकार की बिमारियों से लड़ने में सहायता करता है। यह आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक छमता को बढ़ाता है। एक संतुलित आहार हमारे शरीर में होने वाली विभिन्न बिमारियों जैसे – शुगर , कैंसर , BP , कोलेस्ट्रॉल इत्यादि से हमारी रक्षा करता है।

यह कई तरह के खाने के मेल से बनता है और यह खाना शाकाहारी , मांसाहारी या दोनों का मिश्रण हो सकता है। एक संतुलित आहार में विभिन्न तत्व जैसे – प्रोटीन , कार्बोहायड्रेट , विटामिन , फैट , फाइबर , कैल्शियम , आयरन एवं विभिन खनिज पदार्थ पर्याप्त मात्रा में उपस्थित होने चाहिए।